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किसान भाई रबी फसल गेहूं, चना, मसूर, तेवड़ा, सरसों की फसल में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें। डीएपी उर्वरक की उपलब्धता न होने पर फसल की बुवाई हेतु एसएसपी, यूरिया व पोटाश  या एनपीके के विभिन्न स्रोत 123216, 143514, 102626 20200 का उपयोग करें।

किसान भाई गेहूं की सिंचित अवस्था एवं समय से बुवाई हेतु 120 किग्रा नत्रजन, 60 किग्रा स्फुर व 40 किग्रा पोटाश उर्वरक की पूर्ति हेतु एन.पी.के. 123216- 3 बैग व 30 किग्रा, यूरिया 5 बैग व एम.ओ.पी. 17 किग्रा प्रति हैक्टेयर या एस.एस.पी. 7 बैग व 25 किग्रा, यूरिया 5 बैग 35 किग्रा, व पोटाश 1 बैग का उपयोग करें।

किसान भाई गेहूं की सिंचित अवस्था एवं देरी से बुवाई हेतु 80 किग्रा नत्रजन, 40 किग्रा स्फुर व 30 किग्रा पोटाश उर्वरक की पूर्ति हेतु एन.पी.के. 123216- 2 बैग व 25 किग्रा, यूरिया 2 बैग व 40 किग्रा व एम.ओ.पी. 17 किग्रा प्रति हैक्टेयर या एस.एस.पी. 7 बैग, यूरिया 3 बैग 24 किग्रा, व पोटाश 1 बैग का उपयोग करें।

किसान भाई चना व मसूर सिंचित अवस्था से बुवाई हेतु 20 किग्रा नत्रजन, 60 किग्रा स्फुर व 20 किग्रा पोटाश उर्वरक की पूर्ति हेतु एन.पी.के. 123216- 3 बैग व 38 किग्रा या एस.एस.पी. 7 बैग, यूरिया 43 किग्रा, व पोटाश 33 किग्रा का उपयोग करें।

किसान भाई गेहूं की बुवाई हेतु उपयुक्त बीज दर 100 किग्रा/हैक्टेयर का उपयोग करें व संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग हेतु मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर या नत्रजनःस्फुरःपोटाश 421 में उर्वरकों का उपयोग करें।

किसान भाई गेहूं की फसल को भूमि जनित रोगों से बचाव हेतु बुवाई पूर्व कार्बोक्सिन + थाइरम या कार्बेन्डाजिम + थाइरम मात्रा 21 ग्राम से के अनुपात से उपचारित करें व जड़ माहू व दीमक से बचाव हेतु क्लोरपाइरीफॉस 20 ई.सी. मात्रा 5 मिली/किलो बीज की दर से उपचारित कर बुवाई करें।

किसान भाई चना व मसूर में उक्ठा से बचाव हेतु बुवाई पूर्व कार्बोक्सिन + थाइरम या कार्बेन्डाजिम + थाइरम मात्रा 21 ग्राम से के अनुपात से उपचारित करें उसके पश्चात ट्राइकोडर्मा विरिडी 5-10 ग्राम/किलो बीज की दर से उपचारित कर बुवाई करें।

किसान भाई चना व मसूर में उक्ठा से बचाव हेतु उक्ठा निरोधी प्रजाति RVG-201, RVG-202, RVG-203, RVG-204, JG-36, JG-12 व मसूर की IPL-316, IPL-319, RVL-31 किस्म का चयन करें व खेत की अंतिम बखरनी के समय सड़ी हूई नीम की खली 70-75 किग्रा/हैक्टेयर की दर से डालें व अंतवर्तीय फसल में अलसी की बुवाई करें।